Monday, March 21, 2011

जख्मी शेरों पर कसो नकेल


वही 28 साल से एक सवाल जो हमारे दिलों को हर बेचैन कर देता है। हम हर बार जीतने का ख्वाब संजोते हैं और यह चकनाचूर हो जाता है। क्या इस बार हम विश्वकप जीतेंगे। शायद दिल बोले हां, लेकिन दिमाग बोले नहीं। क्योंकि जिस तरह से आंकड़े और टीम का प्रदर्शन दिखाई दे रहा है, वह कहीं से भी यह अहसास नहीं दिला रहा है कि हम जीतेंगे। हमारे हौसले बड़े हैं, इरादों में भी जान है, लेकिन प्रदर्शन में हम उस लायक दिखाई नहीं दे रहे हैं कि कंगारूओं का गुरूर नीचा कर सकें। जिस तरह से वो दिखाई देते हैं, उन्हें देखते ही हमारे हौसले पस्त हो जाते हैं। खास बात यह है कि कंगारू इस समय जख्मी शेर हैं और इनसे बचना बड़ा मुश्किल है। हां यह अलग बात है कि हमने उन्हें प्रैक्टिस मैच में हरा दिया था, लेकिन वह प्रैक्टिस था, इसलिए कुछ कहा नहीं जा सकता है। इस बार तो माहौल ही कुछ अलग सा दिखाई दे रहा है। जिस तरह से टीम इंडिया का प्रदर्शन है, उससे तो उसे क्वार्टर फाइनल में आने तक के लाले पड़ गए। गेंदबाज साथ नहीं दे रहे हैं। पिछले बल्लेबाज ताश के पत्तों की तरह हो गए हैं, जब देखो ढह जाते हैं। टीम इंडिया की टेल इतनी बुरी तो कभी न थी। इस समय हमें डर भी लग रहा है, क्योंकि हमारे सामने कोई ऐसी-वैसी टीम नहीं है। खुद कंगारू हैं, और उनसे निपटना, मतलब विश्वकप जीतने जैसा है। अगर उन्हें हमने हरा दिया तो हमारे काफी चांस बढ़ जाएंगे। हां टक्कर तो हर टीम के साथ अब जोरदार होगी, और यहां पर एक भी गलती के लिए कोई माफी भी नहीं होगी। धोनी को पूरा देश माफ नहीं करेगा, अगर उन्होंने अच्छा प्रदर्शन नहीं किया तो देश के दिलों में सुनामी भी आ सकती है, जिस दिन भारत यदि हार गया तो फिर उस दिन पूरा देश दु:ख और गुस्से से लबालब होगा और यह सैलाब जाने कहां फूटेगा। शायद इसके बाद हमें आशाा भी छोड़ देनी चाहिए, क्योंकि जिस तरह से पिछले दो साल से नंबर वन का खिताब हमने ले रखा है, वह भी हमसे छिन जाएगा। आज हौसलों को उड़ान भरने देना है। वह छह घंटे 100 ओवर हमें ऐसे खेलना है, जो हमने आज तक नहीं खेला है। पूरे तन मन से। पूरे जुनून से। अगर हम डर के खेलेंगे तो वहीं हार जाएंगे, क्योंकि इस बात को कंगारू भी बेहतरी से जानते हैं और वो किसी भी तरह का कोई रिस्क नहीं लेना चाहेंगे। उनसे जीतना बहुत मुश्किल है, हमने उम्मीद भी नहीं की थी कि उनसे भिड़ना पड़ेगा, लेकिन अब वह आखिरी विकल्प जब आ ही गया है तो फिर डरना किस बात का। खेलो जी जान से, फिर मैदान में जो अच्छा खेलेगा उसी की तो जीत होती है, यह बात पाकिस्तान ने हमें सिखा दी है। उसने आॅस्टेÑलिया को बुरी तरह से परास्त किया है, और न्यूजीलैंड से बेशर्मी से हारा भी है। हां उन्होंने गलतियों से सीखा है, हमें भी सीखना होगा। वो लोग हम पर स्पीड अटैक करेंगे, जिसे हमें पूरी शिद्दत से न सिर्फ झेलना होगा, बल्कि मुंह तोड़ जवाब भी देना होगा। हां हमने अफ्रीका के अटैक को ध्वस्त कर दिया था, यहां भी हमें कुछ ऐसा ही करना होगा। हमारे सामने ब्रेट ली, शेन टॉट और मिचेल जानसन की तिकड़ी रहेगी। हमें इनसे पार पाना होगा, क्योेंकि यही उनकी धार है। ऐसे में सचिन को अपना बेस्ट देना होगा और आज तक उन्होंने जो नहीं किया है, उसे दिखाना होगा। सहवाग और सचिन पर अतिरिक्त जिम्मेदारी बढ़ जाती है, इसके अलावा टीम का हर मेंबर अगर अपना सर्वश्रेष्ठ देगा तो निश्चय ही हम जीत की इबारत लिखने में समर्थ हो जाएंगे। और हम उनसे 2003 के विश्वकप की दो हारों का बदला भी ले लेंगे, जिसमें उन्होंने हमें धूल चटाई थी। उस हार का बदला भी ले लेंगे जो हमें 1999 में उनसे मिली थी। शायद हर हार का बदला लेने का समय आ गया है, अगर हम उन पर विजय पाते हैैं तो हम आधा रास्ता तय कर लेंगे। इसके बाद दो कठिनाइयां हमारे सामने रहेंगी। खास बात यह रहेगी कि आखिरी मैच भारत की सरजमीं पर खेलना है, हमें वहां सर्वश्रेष्ठ दिखाना है, इसलिए हर कीमत पर जीतना है,क्योंकि यह हारे तो जग हारे, यह जीते तो जग जीते।

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