Wednesday, December 29, 2010

जब हमसफर ‘हरामी’ हो जाए

कहते एक महिला के जीवन में कई बार परिवर्तन आते हैं, और वो परिवर्तन उसकी जिंदगी को संवार भी देते हैं और बिगाड़ भी। ये कैसे बदलाव हैं, इन पर गौर करें तो इन बदलावों में पुरुष अधिक प्रभावित नहीं होता है और न ही उसके जीवन में ऐसी कोई फांस आती है, वह जीवनभर जिस नदी में तैरता रहता है, उसे वहीं अपना जीवन निकालना होता है। मगर स्त्री के साथ ऐसा नहीं है, वह एक नदी, नहीं कई नदियों में जीवन बसर करती है, ऐेसे में कभी-कभी उस नदी के साथ उसके लिए वरदान बन जाते हैं तो कभी-कभी श्राप। कहते हैं जीवन स्वयं नहीं बिगड़ता है, बल्कि दूसरे लोग बिगाड़ देते हैं, जिन पर हम भरोसा करते हैं, वही जब भरोसे का कत्ल करते हैं, तो आसंू नहीं आते, बल्कि आदमी अंदर से ही टूट जाता है। फिर वह दोबारा खड़ा नहीं हो पाता है, उसकी जिंदगी की सारी उम्मीदें टूट जाती हैं और हौसलों की उड़ान हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है। जब हम नदी में पत्थर मारते हैं तो वह थोड़ी उछलती है, लेकिन इसके बाद वह शांत हो जाती है, बस यही कहानी है समाज में स्त्री की। उसके जीवन में पहला मोड़ वह आता है जब वह अपने घर में रहती है, अगर माता-पिता सही हैं, तो वहां उसकी जिंदगी सुंदरम कहलाती है, इसके बाद सबसे बड़ा जो मोड़ है, शादी के बाद आता है। यहां अगर हमसफर शानदार रहे तो जीवन सुंदरम हो जाता है, लेकिन जब हमसफर हरामी हो जाए तो समझ लो पल-पल मौत से दो चार होना पड़ता है। आज के समाज में हालांकि स्त्री को उन्नति मिली है, लेकिन यह उन्नति का हिस्सा बहुत कम है, अब भी कई प्रतिशत महिलाएं अपनी पतियों के ठाठ को अपने मांग का सिंदुर सजा कर चल रही हैं। वह उनसे बात करने में कांपती हैं, वह उनसे कुछ कहने से डरती है। अपने पतियों की इच्छा वो अपनी तकलीफों को सहकर पूरी करती हैं। कभी-कभी दर्द से तड़पती रहती हैं, इसके बावजूद वो पति को कोई कष्ट नहीं होने देती हैं। इसके बावजूद वह निकम्मा पति शराब का शौकीन हुआ तो जीवन की गत और बुरी हो जाती है। क्योंकि शराब उस बुराई का नाम हैै जो आदमी को जिंदा लीलती है और इतने धीरे की खुद उसे पता नहीं पड़ता। हां वह जानता है कि उसे क्या करना है, लेकिन मजबूरी रहती है उसकी। क्योंकि उसके मोहपाश में वह उलझा रहता है, और इससे छुटकारा उसे नहीं मिलता है। यह मोड़ महिला को जीवन भर की टीस देता रहता है, यहीं से उसकी और उसके उम्मीदों का दामन टूटता है। आडंबर भी हौसलों से बढ़कर होता है, इन हौसलों को यह शराब लील जाती है। उस महिला का दमन होता है, उस दमन का दर्द उसके सीने को छलनी करता रहता है। इसलिए इन्हें बचाना बहुत जरूरी होता है। अब सवाल उठता है कि महिला सशक्त कैसे बने, क्योंकि हमसफर हरामी है, तो यहां पर मां-बाप की जिम्मेदारी बहुत बढ़ जाती है, अगर वो बिलकुल ध्यान से और चुनकर अपनी बेटी की जिंदगी उसे सौंपे जो वास्तव में इंसान हो। जीवन से प्यार करता हो, धुएं में जिंदगी को उड़ाता न हो। वह उससे भी प्यार करे, जो उसे बहुमूल्य चीज दी जा रही है, अब निर्णय आप पर है, क्या आप अपनी बेटी की जिंदगी को जन्नत में देना चाहते हो, या फिर उसे जहन्नुम बनाना चाहते हो। आपकी एक गलती उसके जीवन को बर्बाद कर देती है।

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