मन में उफान, जज्बे में आसमान। आगे बढ़े तो चट्टानें छोटी पड़ जाए, पर्वत चढ़े तो उूंचाई कम पड़ जाए। हौसले ऐसे हैं कि आकाष सलामी देता है, सपने इसके पूरे हो, यह पूरी कुर्बानी देता है। यह है हमारा उूर्जा से लवरेज युवा। उलझते, सुलगते, झुलसते मुद्दे रहते हैं, इसके पास। दुनियां को जीतने के लिए देष को इनसे बड़ी आस है । तब क्यों न हम इनके कंधों पर ऐतबार करें, इन्हें ही जब बागडोर दे दी है तो पूरे विष्वास से इन पर भरोसा करें। जो हालात हमारे हैं, वो काफी अच्छे तो नहीं कहे जा सकते हैं, लेकिन हमारे युवा के सैलाब को दूसरे देष भलिभांति जान चुके हैं। हम बहुत अधिक युवा संपन्न देषों की राह पर खड़े हैं तो क्या ऐसे में फर्ज हम युवाओं का नहीं है। हमसे जो उम्मीदोें को पाला गया है, क्या उसके लिए हमें आगे आना नहीं चाहिए। देष के हाल-ए-हकीकत से हर कोई वाकिफ है। यहां दुर्दषा दुर्दांत बनती चली जा रही है। अपराध की चादर ने आकाष तक को ढंकने की नाकाम कोषिष कर चुकी है। झूठ का तिकड़मी जाल पूरी ताकत के साथ फैल रहा है। लूट-घसूट समाज में बुरी तरह अपने पैर फैला चुकी है। हर तरफ तबाही ही तबाही नजर आती है। तो ऐसे में हम क्या किसी मसीहा की तलाष करेंगे, जी नहीं। बल्कि मसीहा हमारे बीच में ही है। वह भी एक नहीं हजार नहीं लाख नहीं करोड़ों की संख्या में। जरूरत है हमारे जमीर को जगाने की, अंदर के इंसान को इंसान बनाने की। यहां कोई दावा नहीं और कोई वादा नहीं। कोई छल नहीं और कोई लालच नहीं।सबकुछ विष्वास की परखनली से टिम-टिम बूंद की तरह निकलेगा। वह युवा ष्षक्ति ही है जो समाज को एक नई दिषा दे सकती है। उस डूबती वैतरणी को पार लगाने में यही ष्षक्ति समर्थ है। यहां न तो देषभक्त बनने की बात हो रही है और न ही डींगे हांकने की। यहां सिर्फ इतना कहना है कि ईमानदारी से कार्य कर देष के विकास को पहले रखा जाना चाहिए। अगर यह करना सीख गए तो हमारे देष को युवा पर लग जाएंगे और वह आकाष की लंबी उड़ान बिना थके भर सकेगा। सैकड़ांे समस्याएं कदम-कदम पर मुंह उबाए खड़ी हुई हैं। इसका न तो कोई परमानेंट इलाज किया जा रहा है और न ही लगता है। इसकी कौन लेगा जिम्मेदारी। कोई नहीं। हर कोई अपनी रोटियां सेंकने में और दाल दलने में लगा है। समाज में अंधेरा हो रहा है या उजाला किसी को क्या लेना देना। तो ऐसे में कौन जागेगा, आप को जागना होगा ।हम युवाओं को जागना होगा। अगर हम थोड़ी सी भी अपनी जिम्मेदारियों को समझ गए तो निष्चय ही इस देष की काया पलट सकती है। इसका नक्षा चेंज हो सकता है। इसलिए देष की उम्मीदों को युवाओं के सहारे की जरूरत है। इसमें अगर उन्होंने अपनी उूर्जा दिखा दी तो देष के विकास में चार चांद लग जाएंगे। बस इसी आग की जरूरत है। सफलता सामने पड़ी है, लेकिन उसे पकड़ने मत दौड़ों, बल्कि खुद के कद को इतना बढ़ा लो कि वह खुद-ब-खुद तुम्हारी पहुंच में आ जाए।
Monday, December 28, 2009
Thursday, December 17, 2009
नया साल, बुरा हाल

Wednesday, December 16, 2009
कोपेनहेगन में क्या किया?

Tuesday, December 15, 2009
हारते तो मुंह भी न दिखा पाते

Monday, December 14, 2009
वतन में आने के जतन
तो जब ये दिल हिंदुस्तानी है और हिंदुस्तान के लिए, अपनों के लिए तड़पता है तो हम क्यों उसे छोड़कर चले जाते हैं। इसके पीछे ज्यादा गहराई नहीं है, लेकिन कई बार हमारे हालात हमें मजबूर कर देते हैं कि हम बाहर जाकर कुछ करें, हमारी जिंदगी जहन्नुम बनी रहती है, उससे निजात पाने के लिए इस तरह के कदम उठाए जाते हैं। सैकड़ों लोग हालात के मारे और वक्त के हारे रहते हैं जो दूर देष जाने का कदम उठाते हैं। जो मर्जी से जाते हैं उनका तो ठीक, लेकिन जिन्हें हालातों के चलते अपने मुल्क से अलविदा कहना होता है, निष्चय ही वो बहुत ही दुःखद होता है। उनके जिस्म एक मुल्क में जान दूसरे मुल्क में रहते हैं। विभाजन के दर्द को देखें तो ऐसे कई परिवार मिल जाएंगे, जिन्हें कब्र नसीब हो गई, लेकिन परिवार से मिलने का मौका नहीं मिल सका। इस दर्द को वो भगवान और अल्लाह के पास लेकर चले गए। कई बार तो हालात यहां तक हो गए कि उनकी अर्थी को कांधा किसी बाहर वाले ने दिया और कब्र को किसी और ने दफनाया। यह है विभाजन का दर्द, अपनों से बिछड़ने का गम। विभाजन की यह त्रासदी और और मर्जी से दूर जाने में दर्द में भले ही अंतर आ जाता है, लेकिन वतन में आने और यहां रहने की तड़प में हर दिल मचलता है। तो हम क्यों अपने दिल की क्यों नहीं सुनते हैं, तोड़ सारे बंधन, छोड़ दो सारे माया-मोह। और आ जाओ अपनी जमीं पर, अपने वतन पर। क्योंकि यह देष हमारा है और यहां की माटी हमें कर्ज उतारने के लिए पुकार रही है।
Thursday, November 19, 2009
Wednesday, November 18, 2009
Tuesday, November 17, 2009
Monday, November 16, 2009
Sunday, November 15, 2009
Tuesday, November 10, 2009
Monday, November 9, 2009
Sunday, November 8, 2009
स्टोरी आईडिया
- दरअसल आज कल ८ से ११ साल की उम्र के बच्चे जिम कर रहे हैं।
इस पर हम स्टोरी कर सकते हैं।
- हमें ३-४ बच्चों को सर्च कर उनसे पूछ सकते हैं की इस उम्र में जिम की क्या जरूरत ।
- जिम में बात की जा सकती है। ३-४ लोगो की राए ले सकते हैं
- दोक्टेर्स से बात हो सकती है। क्योकि इस उम्र में जिम नुक्सान भी कर सकती है
- इनके गोल क्या हैं इस पर भी बात कर सकते है
Saturday, November 7, 2009
Friday, November 6, 2009
स्टोरी आईडिया
- इसमे डॉक्टर से बात की जा सकती है, उन लोगों , महिलाओ से बात कर सकते हैं जोदेत पर हैं।
- उनसे भी बात हो सकती हैं जो नया टाइम टेबल बना रहे है ।
- हर आगे के लिए डॉक्टर से बात कर राइ दी जा सकती है।
- कुछ फोटो करवाकर बेहतर प्रेसेंट किया जा सकता है।
Monday, November 2, 2009
Saturday, October 31, 2009
Thursday, October 29, 2009
Tuesday, October 27, 2009
Monday, October 26, 2009
Sunday, October 25, 2009
Friday, October 23, 2009
Thursday, October 22, 2009
Tuesday, October 20, 2009
Friday, October 2, 2009
Tuesday, September 15, 2009
Friday, September 11, 2009
Thursday, September 10, 2009
Wednesday, September 9, 2009
Friday, September 4, 2009
Wednesday, September 2, 2009
Tuesday, September 1, 2009
Sunday, August 30, 2009
Friday, August 28, 2009
Tuesday, August 25, 2009
Sunday, August 23, 2009
Thursday, August 20, 2009
Wednesday, August 19, 2009
Tuesday, August 18, 2009
Monday, August 17, 2009
Sunday, August 2, 2009
स्वयेम्बर में चुना वर

राखी का ड्रामा ख़त्म...अब नौटंकी शुरू होगी
पिछले दो माह से colour channel पर चल रही अब तक की सबसे बड़ी नौटंकी का अंत हो गया या शुरू । राखी sawant ने kaliyug के इस swamver में अपना वर chun लिया है।
वर banne का सौभाग्य paya है canada के elesh ने। अब ये उनका saubhagya रहेगा या durbhagya बन jayeg ye to aane वाला समय ही तय करेगा। filhaal to राखी ने स्वयेम्बर rachakar इतिहास to bana ही लिया है। aab राखी itihaas महिला हो गई हैं । क्योंकि unhe स्वयेम्बर वाली दुल्हन के लिए याद किया जाएगा। मगर बाज़ार में पैसे की keemat कुछ भी के tark पर color channel ने darshko के सामने badiya autanki pesh की। लोग इस शो में दुल्हन से इन doolho को bachao की guhar लगा रहे थे। वे राखी के इस शो की khoob burai कर रहे थे bavjood इसके उसे देख रहे थे। यही channel valo को chahie था। बिन phere हम तेरे वाली इस दुल्हन elesh को मिल to गई । ladoo भी kha लिया मगर elesh का घर अब charcha में रहने वाला है। kyoki राखी को sambhalna उनके बस की बात नही। ये kachi kali नही है। बल्कि tekhee chhuree है। सोचो sagai के बाद अब राखी उसका टेस्ट कैसे lengi ।
elesh उनके लिए chai layenge maidam chai उठा के phek dengi । miya नीचे soyenge kyoki राखी आज की naari है । अगर वे कभी कहेंगे की मेरी tai कहाँ है। to राखी kahengi मैंने नही ले राखी ....तुमने mujh पर shak किया। jhagda शुरू। कभी elesh ने tv on किया to राखी bolengi सारे channel मई deekhati hu। jhagda शुरू । किसी दिन elesh को gussa आ गया to क्या होगा। भूल कर elesh ये गलती मत कर baithna । kyoki राखी इसके बाद tumhara huliya bigad देगी । तुम पर rape का केस , gharelu hinsa। moder का chharj , मानsik pratadna जैसे anginat kesh हो जायेंगे। इसके बाद आप lagao cort के chakkar । यही नही हो सकता है saja भी हो jae। ये to कुछ नही आगे और है जिसमे आपको dhamkiyan भी मिल सकती है। हो सकता है gunde आप को पीट भी दे। apki जिंदगी के sare कष्ट राखी maidam से मिल सकते है। इसलिए इन्हे gale में bandhane की जरूरत नही।
Sunday, July 26, 2009
ये महबूब की मेहनत है

Saturday, July 25, 2009
बारिश की शादी माशा अल्लाह

Friday, July 24, 2009
पटना ने देश के मुंह पर पोती कालिख
क्योकि देश की सभ्यता और संस्कृति की दुहाई देने वाले इस देश में जो हुआ , वो हमें तालिबान जैसे दुष्ट देशों के पड़ोस में खड़ा कर देता है । पटना में दिन दहाड़े एक लड़की के कपड़े फाड़े गए । वो तो दोषी है ही जिन्होंने ये कृत्य किया है । मगर सबसे बड़े दोषी वो है जो इसे नपुंसक की भातीं देखते रहे । सरेआम उस लड़की को नंगा किया गया । उसके बचाओ में एक आवाज़ भी नहीं उठी । वाह रे मेरे देश के वीरो । जरा सी बात पर देश पर मर मिटने की सौगंद लेने वालो , यहाँ तुम्हारी वीरता नहीं जगी । तुम्हारे अन्दर का इन्सान कहाँ मर गया । डूब मरो चुल्लू भर पानी में . घर जाकर अपनी घर की औरतों की चूडियाँ पहन लो । क्योंकि जिस कृत्य को अपनी आंखों के सामने देखकर ए हो उसे सुनकर वे कभी गर्व नहीं कर सकती हैं ।
यह पटना की इस घटना ने देश पर कालिख पोत दी है । यह बता दिया है की हम कितने कमजोर है, स्वार्थी हैं। आज बात दूसरे की थी , पर पड़ोसी का घर जलता है तो आग की लपते अपने घर को भी तहस नहस कर देती है। यह कल आपके साथ भी हो सकता है । तब आप भी किसी दूसरे से कोई उम्मीद न रखे । फिलहाल इस घटना ने देश को शर्मसार कर दिया है ।
Wednesday, July 22, 2009
झूठिस्तान का झूठ
हर सवाल का जवाब है। कोई बातो से लडे तो ये वाचाल है, कोई हतियारो से लडे तो यह तैयार है, कोई आरोपरोप लगाये तो यह महा आरोपी है । हर चीज़ में इसका कोई जवाब नही। कश्मीर से लेकर लाहौर तक पाकिस्तान के बोलबाले । हम कितनी दोस्ती दिखा डे मगर ये तो गद्दारी ही करेंगे। अब नया शिगूफा सुनो । महाशय कह रहे है की लंका टीम पर हमला हिंदुस्तान ने किया है। वाह झूठिस्तान जी आपके क्या कहना । गाज कूद पर गिरी तो दुसरे पर आरोप लगा रहे हो। इतनी बार आपको माफ़ किया , उसका ये सिला दे रहे हो। आखिर कब तक तुम्हे हम माफ़ करेगे । सुधर जाओ नही तो दुनिया के नक्शे पर भी नही दिखोगे ।
Tuesday, July 21, 2009
दरिया की दास्ताँ

Monday, July 20, 2009
मदमस्त मौसम
सावन की रिमझिम फूहार, मयूरी मन में चली ये बयार
क्यो न आज सावन को जिया जाए, बरसती बूंदों का मजा लिया जाय
बूंदों की साजिश में, मन ने की गुजारिश
क्यों न इस मतवाली पवन में कुछ देर के बूंदों को मुट्ठी में कैद किया जाए
मौसम की रूमानियत देखकर मन उमंगी हो गया
सावनी दिल मचल उठा ,आज dosto के sath barish में बचपन की मस्ती की जाए फिर क्या था, पहनी हाफ नेक्कर और लिए आठाने -बाराने की चिल्लर और कूद पड़े तलईया me . laga aaj sawan me bachpan ji liye .......